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भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून में हिंदी चेतना मास-2024 का उद्घाटन समारोह दिनांक सितम्बर 02, 2024 को आयोजित किया गया

भाकृअनुप- भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून में दिनांक 02 सितम्बर 2024 को हिंदी चेतना मास का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया |

इस समारोह में श्री गुरु रामराय विश्वविद्यालय, देहरादून की प्रोफेसर पूजा जैन बतोर मुख्य अतिथि आमंत्रित थीं | प्रो. पूजा जैन ने अपने अनुभवसिंचित वक्तव्य से सभी श्रोताओं का ज्ञानवर्धन करने के साथ-साथ उन्हें हिंदी के प्रति निष्ठापूर्ण ढंग से काम करने के लिए प्रेरित किया

हिंदी भाषा पर अपना विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र की उक्ति -

"विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार |
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार ||"

का सन्दर्भ देते हुए सभी वैज्ञानिकों का आह्वान कि यह उनका नैतिक दायित्व है कि वे समस्त वैश्विक ज्ञान- विज्ञान का अर्जन भले ही अंग्रेजी भाषा में करें लेकिन उस ज्ञान को हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाएं | ब्रिटिश शासन द्वारा अपनी भाषा को जबरदस्ती भारतवासियों पर थोपने की प्रवृति की चर्चा करते हुए उन्होंने महात्मा गाँधी, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन एवं अन्य मनीषियों का उल्लेख किया जिनके प्रयासों से हिंदी को भारत के संविधान में संघ सरकार की राजभाषा का दर्जा प्राप्त हो सका | उन्होंने भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान की पूर्णतया हिंदी में तैयार एवं अद्यतन वेबसाइट की प्रशंसा करते हुए निदेशक महोदय को धन्यवाद दिया| ‘’राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’’ में भाषा के सन्दर्भ में उल्लिखित प्रावधानों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि श्री गुरु रामराय विश्वविद्यालय, देहरादून ने हिंदी भाषा के माध्यम से उच्च शिक्षा का अध्ययन / अध्यापन का कार्य आरम्भ किया है और गढ़वाली भाषा के लिए अलग विभाग बनाने का प्रयास चल रहा है |

अपने अध्यक्षीय संबोधन में संस्थान के निदेशक डॉ. एम. मधु ने कहा कि भारत ऐसा देश है जहाँ पर बोलियों का स्वरूप प्रत्येक मील पर बदलता रहता है, जहाँ पर प्रत्येक राज्य की अलग-अगल भाषाएँ है वहां सभी को जोड़ने का कार्य हिंदी भाषा करती है | हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम अधिक से अधिक हिंदी भाषा में अपना कार्य करें | आज जबकि माननीय प्रधानमंत्री महोदय श्री नरेंद्र मोदी जी का यह आह्वान कि भारत वर्ष को आधुनिक ज्ञान एवं विज्ञान के क्षेत्र में पुन: विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना है तब हिंदी भाषा का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योकि हिंदी भाषा का आलम्बन लेकर ही इस सपने को पूरा किया जा सकता है |

इस अवसर पर संस्थान के उप निदेशक (राजभाषा) श्री आशुतोष कुमार तिवारी द्वारा संस्थान में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन एवं उपलब्धियों की एक झलक पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत की गई | उद्घाटन समारोह में मुख्यालय तथा क्षेत्रीय अनुसंधान केंदों के लगभग 60 वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों नें भाग लिया |

इस कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय संस्थान के उप निदेशक (राजभाषा) श्री आशुतोष कुमार तिवारी द्वारा किया गया |

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