स्क्रीन रीडर एक्सेस
मुख्य विषयवस्तु में जाएं
नेविगेशन पर जाएं
अंग्रेज़ी
ईआरपी लॉगिन
ई-ऑफिस लॉगिन
ई-मेल लॉगिन
ई-सपोर्ट सिस्टम
logo-img
logo-img
logo-img
  • मुख्य पृष्ठ
  • हमारे बारे में
    • संस्थान के बारे में
      • इतिहास
      • एक नजर में
      • शासनादेश
      • संगठनात्मक संरचना
      • हमारे निदेशक
      • हमारे उप-महानिदेशक
    • हमारा नज़रिया
      • विजन 2030
      • विजन 2050
    • कार्मिक
      • वैज्ञानिक
      • तकनीकी अधिकारी
      • प्रशासन
      • कुशल सहायक स्टाफ
    • विभाजन
    • केंद्र
      • मुख्यालय
      • अनुसंधान केंद्र
    • हम तक कैसे पहुंचे
    • मौजूदा स्टाफ
    • आरएफडी
    • आईएसओ प्रमाणित संस्थान
    • पेंशनभोगियों के लिए
    • बजट एवं राजस्व
  • अनुसंधान
    • परियोजनाएं
    • अनुसंधान की मुख्य विशेषताएं
    • उपलब्धियों
    • शोध पत्र
    • पुरस्कार / सम्मान
  • प्रशिक्षण
    • मानव संसाधन विकास
    • सूचनाएं
    • अध्ययन
    • प्रशिक्षण नियमावली
  • हमारे केंद्र
    • आगरा
    • बेल्लारी
    • चंडीगढ़
    • दतिया
    • कोरापुट
    • कोटा
    • ऊटी
    • वसाड
  • सेवाएं
    • कंसल्टेंसी
    • समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर
    • प्रशिक्षण
    • पुस्तकालय
    • डेटाबेस
    • शैक्षणिक
  • डिजिटल लाइब्रेरी
    • प्रकाशन
    • राजभाषा अनुभाग
    • फोटो गैलरी
    • वीडियो गैलरी
    • मॉडल वाटरशेड
    • डेटाबेस
    • संग्रहालय यात्रा
    • प्रौद्योगिकी विवरणिका
    • टेक. बुलेटिन
    • समाचार पत्रिका
    • वार्षिक रिपोर्ट
    • पोस्टर
    • प्रशिक्षण नियमावली
    • कार्यवाही
    • आईआरसी कार्यवाही
    • ब्लॉग
    • मूल्यांकित प्रकाशन
    • डिजिटल लेक्चर लाइब्रेरी
  • सुविधाएँ
    • प्रयोगशाला
    • एकेएमयू सेल
    • सेमिनार हॉल
    • प्रदर्शनी कक्ष
    • गेस्ट हाउस
    • अनुसंधान फार्म
  • सूचना पट्ट
    • सूचनाएं
    • निविदाएं
    • रिक्तियां
    • डाउनलोड
    • परिपत्र
    • आईसीएआर आयोजन
  • किसान क्षेत्र
    • तकनीकी
    • सफलता की कहानी
    • विवरण पुस्तिका
    • हेल्प लाइन
    • आउटरीच

होम News

डॉ. जे.एस. सामरा, पूर्व उप महानिदेशक, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारतीय राष्ट्रीय बारानी क्षेत्र प्राधिकरण, नई दिल्ली ने भामृजसंसं, देहरादून का दिनांक 22 से 25 दिसंबर, 2023 तक दौरा किया

डॉ. जे.एस. सामरा, पूर्व उप महानिदेशक, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारतीय राष्ट्रीय बारानी क्षेत्र प्राधिकरण, नई दिल्ली ने भाकृअनुप-भामृजसंसं, देहरादून के निदेशक डॉ. एम. मधु और संस्थान के वैज्ञानिकों साथ विभिन्न शोध प्रस्तावों पर बातचीत की और चर्चा की। डॉ. मधु ने उन्हें संस्थान की हालिया शोध गतिविधियों और उपलब्धियों से अवगत कराया। डॉ. समरा वर्तमान में संस्थान के क्यूआरटी के अध्यक्ष के रूप में योगदान दे रहे हैं, जो 5 वर्षों में एक बार होता है।

डॉ. सामरा ने भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून में आयोजित चार महीने के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के 126वें बैच को 'भारत के विभिन्न सश्य-पारिस्थितिक क्षेत्रों हेतु संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकियां' पर व्याख्यान दिया। उन्होंने सहभागी स्वरुप के तहत प्राकृतिक संसाधन संरक्षण में किसानों की भूमिका के बारे में चर्चा की। उन्होंने उत्तर-पूर्व क्षेत्र में स्थानांतरित खेती और क्षेत्र की तटस्थता और टिकाऊ उत्पादन प्रणाली की दिशा में इसके समाधान के बारे में बताया। उन्होंने केरल में पादशेखरम प्रणाली और जलवायु परिवर्तन से प्रेरित मौसम की अनिश्चितताओं के लिए उपयुक्त अनुकूलन रणनीतियों के बारे में भी चर्चा की।

Dr. J.S. Samra, Former DDG NRM (ICAR) and Ex CEO, National Rainfed Area Authority of India, New Delhi visited ICAR-ICAR-IISWC, Dehradun during 22-25 December, 2023
Dr. J.S. Samra, Former DDG NRM (ICAR) and Ex CEO, National Rainfed Area Authority of India, New Delhi visited ICAR-ICAR-IISWC, Dehradun during 22-25 December, 2023

डॉ. सामरा ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला और अधिकारी प्रशिक्षुओं को क्षेत्र विशिष्ट प्रौद्योगिकियों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने संस्थान की प्रगति और विशेषकर मानव संसाधन विकास एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की सराहना की.

डॉ. चरण सिंह, विभागाध्यक्ष, मानव संसाधन विकास एवं सामाजिक विज्ञान विभाग ने औपचारिक रूप से डॉ सामरा का स्वागत किया और प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान बैच में 5 राज्यों के मृदा संरक्षण अधिकारी भाग ले रहे हैं जिनमें महिलाएं अधिक हैं उनके अनुसार इस प्रशिक्षण के माध्यम से अब तक विभिन्न राज्यों के कृषि विभागों के लगभग 3500 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

डॉ. एम मुरुगानंदम, प्रधान वैज्ञानिक और प्रमुख (पीएमई और केएम यूनिट) ने डॉ. समरा को ओएनजीसी से फंड का लाभ उठाते हुए सौर ऊर्जा की उन्नति के लिए एक सहयोगी परियोजना की क्षमता से अवगत कराया, जिसमें उन्होंने गहरी रुचि दिखाई। डॉ. सामरा ने ग्रीन क्रेडिट और कार्बन प्रबंधन पर महानिदेशक, आईसीएफआरई और आईसीएफआरई और एफआरआई के अन्य अधिकारियों के साथ चर्चा की। अंत में प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. लेख चंद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

आईसीएआर ई-प्लेटफॉर्म

  • आईएएसडब्ल्यूसी
  • सेरा
  • आईसीआरआईएसएटी
  • कृषि पोर्टल
  • पीएमएस लॉगिन
  • एआरएमएस लॉगिन

महत्वपूर्ण लिंक

  • नागरिक/ग्राहक चार्टर
  • आरटीआई अधिनियम
  • मेट की जानकारी
  • एनआरएम संस्थान
  • मीडिया में
  • आईसीएआर न्यूज़
  • आईसीएआर वेबसाइट
  • इनाम परियोजना
  • महत्वपूर्ण वेबसाइटें

संसाधन

  • सैफ
  • जनहित प्रकटीकरण और मुखबिरों की सुरक्षा
  • राज्यवार रिपोर्ट
  • ऑनलाइन सॉफ्टवेयर
  • रिक्तियां
  • सतर्कता अधिकारी
  • एसीआरबी
  • साइटमैप

नीति

  • गोपनीयता नीति
  • अस्वीकरण
  • लिंकिंग नीति
  • कॉपीराइट नीति
  • हम तक कैसे पहुंचे
  • टेलीफ़ोन डाइरेक्टरी
  • डिजिटल पेमेंट
हमें फॉलो करें
  • आईसीएआर.आईआईएसडब्ल्यूसी 218 कौलागढ़ रोड देहरादून.उत्तराखंड      91-135-2758564      director [dot] iiswc [at] icar [dot] gov [dot] in
कॉपीराइट @ 2023 आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी सर्वाधिकार सुरक्षित
  Powered by : Webline